Mar 25, 2020

मजदूरों का हाल...

किसी ने सच ही कहा है कि "हाथी के खाने के दांत कुछ और तथा दिखाने के दांत कुछ और"।
जहां हाथी जो एक जानवर है लेकिन फिर भी शातिर वो बुर्जुआ वर्ग है और समझदार इंसान सर्वहारा वर्ग जो जैसा देखते है वैसा ही समझते है।
वहीं सर्वहारा वर्ग आज कोरोना के दहशत के बीच भूखे-प्यासे, कड़ी-धूप में दर-दर भटक रहे है और सरकार तमाशबीन बनी हुई है।
क्या सर्वहारा वर्ग एक डिस्पोजेबल वस्तु के समान है जिससे जब चाहा काम किया फिर काम होने के बाद कचड़े में फेंक दिया?

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Feb 29, 2020

मत खून बहाओ भारत का...

भारत है उन इन्सानों का,
जो इंसान, इन्सानों के लिए लड़ते है; 
भारत है उन लोगों का, 
जो एक-दूसरे पर जुल्म-
भेदभाव नहीं करते  है; 
मत खून बहाओ भारत का, 
मत खून बहाओ भारत का... 


मंदिर-मस्जिद में अंधे होकर, 
नफरत की भाव न जगाओ तुम; 
इस नफरत की आँधी में, 
हिंसा की आग न लगाओ तुम; 
मत खून बहाओ भारत का, 
मत खून बहाओ भारत का... 


हिन्दू-मुस्लिम के झगड़े छोड़ो, 
प्यार से नाता जोड़ो; 
मत खून बहाओ भारत का, 
मत खून बहाओ भारत का... 


अंधभक्त धर्म के नामपर, 
एक-दूसरे का घर जलाते है; 
कोई जय श्रीराम, 
तो कोई अल्लाहु-अकबर गाते है; 
मत खून बहाओ भारत का, 
मत खून बहाओ भारत का...


यह देश है हर इन्सानों का, 
जो सत्य, समानता, मानवता 
और प्रेम के लिए मरते है; 
राजनीति में नेता मुद्दों से 
ध्यान भटकाने के लिए, 
हिन्दू-मुस्लिम करते है; 
मत खून बहाओ भारत का, 
मत खून बहाओ भारत का... 


मजदूर, दलित, किसानों में, 
शिक्षा का भाव जगाओ तुम; 
पूंजीवाद खत्म कर, 
शोषण मुक्त भारत बनाओ तुम; 
मत खून बहाओ भारत का, 
मत खून बहाओ भारत का... 


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