एसकेएमसीएच में बच्चों के मौत पर जनता के प्रति सरकार का रवैया

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के एक अस्पताल(एसकेएमसीएच) में एनडीटीवी के ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक एक्यूट एंसिफलाइटिस से मरने वाले बच्चों की संख्या 100 से अधिक हो चुका है जबकि 2014 में भी 139 बच्चों की मौत हो गई थी. 2012 में 178 बच्चों की मौत हो गई थी. अस्पताल में शुरू से ही डॉक्टर, दवाई तथा उचित उपकरणों की अनुपलब्धता रहा है इसका ज़िम्मेवार तो यहाँ की सरकार ही है जब 2014 में जब छोटे छोटे बच्चे मौत हुई तभी यह कहा गया था कि अब इसपर सुधार किया जाएगा लेकिन आजतक ऐसा कुछ भी नहीं लग रहा है कि इसमे कुछ सुधार किया गया हो। इन नेताओं का मंशा सिर्फ गरीब लोगों को जागरूक न कर केवल अमीर लोगों को जागरूक करते है तभी तो अमीर लोग तुरंत किसी अच्छे प्राइवेट या जिस अस्पताल में सारी सुविधाएं हो और गरीब लोग किसी भी छोटे मोटे सरकारी और गैर-सरकारी अस्पतालों में जहां सारी सुविधाएं नहीं मिलती है वहाँ मरीज का इलाज़ कराते है। जिससे गरीब लोगों के मरीजों को सही तरीके से इलाज़ न होने के कारण उन्हें मौत का रास्ता देखना पड़ता है।



यहाँ की सरकार शुरू से ही इस दोहरी नीति के समर्थन में रहा है। वे केवल चुनाव के समय अपनी शक्ल दिखाने तथा जुमलेबाजी करने आ जाते है। लेकिन वे सबसे ज्यादा अमीरों के संपर्क में रहते है क्योंकि वे नेता जब अमीरों के घर जाते है तो वहाँ उनका आदर सत्कार किया जाता है, गर्मी है तो एसी वाले कमरे में बैठाया जाता है, अच्छा भोजन कराया जाता है और ज्यादा प्रश्न भी नहीं किया जाता है। और गरीबों के बीच ये नेता लोग इसलिए नहीं दिखाई देते है क्योंकि यहाँ भी नेताओं का आदर सत्कार होता है, अगर गर्मी है तो हत्था पंखा से हवा लगाते, खुद को अच्छा भोजन नसीब हो या न हो लेकिन नेताओं को अच्छा भोजन कराया जाता है और जब गरीब लोग प्रश्न उठाते है तो वो बार बार बातों को घुमाने की कोशिश करते है और यहाँ तक यह भी बोल देते है कि "क्या मै अपना अपमान करने यहाँ आया था?" फिर इस सवाल को सुनते ही यहाँ के लोग चुप हो जाते है क्योंकि इन गरीब लोगों में जागरूकता नहीं है जागरूक होने के लिए अच्छी शिक्षा की जरूरत होती है जो ग्रामीण स्कूलों में उपलब्ध नहीं है। ये लोग गरीबों को गरीब जानबूझकर रखना चाहते है क्योंकि अपनी कुर्सी गरीब लोगों को ही भ्रमित कर अपना वोट बैंक बनाए हुये है। लेकिन ये कभी कभी तो चुनाव जीतने के लिए गरीबों को लुभा कर भी वोट लेते है क्योंकि ये गरीब जनता नेताओं के सामने बेवकूफ है और यह गरीबों को छोटी मोटी नौकरी तक ही सीमित कर दिया जाता है। अगर जनता ज्यादा पढ़ा तो मुझपर सवाल उठाने लगेगा यह इन नेताओं का मानना है। इसलिए ये सभी नेताएं ऐसा ही चाहते है लेकिन हमलोग ऐसा होने नहीं देंगे। हमलोग एक दूसरे को शिक्षित कर जागरूक करेंगे तथा सभी को समान अधिकार दिलाएँगे।
 

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