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Biography

       Ashish Kumar Ranjan is an Indian boy(student). His childhood name is Vishwamohan. He has been living in Samastipur, Bihar(India) and Gurdaspur, Punjab(India) all their life travelling is one of their hobbies. He has recently been to Nepal and It's much like Punjab, there's lot of people everywhere you look. He likes Odissi dancing, watching movies, internet surfing, acting, listening music, running, swimming, chatting with public and with friends, improving bad people to making a good people them and many things. He is currently following study in University of Delhi, India. He has recently worked Security in G4S at Jawaharlal Nehru University, New Delhi. Now, he is working as DET at Samvardhana Motherson Auto Component Pvt. Ltd.-2. He is loving son of their mother and their father. When he is passionate about something, he goes to extreme efforts to meet own passion. He loves to go out and explore the world.

~DATE OF BIRTH AND PLACE~

  •  They born on December 02, 1995 in Samastipur. 


~EDUCATION~

  •  They have been studied class 1st to 5th at Govt. Primary School Bishanpur Sonsa, 
  • Class 6th to 8th at Govt. Buniyadi School Bhorejairam, 
  • Class 9th to 10th at R(Rajmani) High School Bhoreshahpur, 
  • Class 11th to 12th stream science with biology at Samastipur College Samastipur, 
  • Course Diploma(Mechanical Engineering) at SGI Gurdaspur 

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Effect of Positive Thinking in Hindi

एक ऋषि के दो शिष्य थे | जिनमें से एक शिष्य सकारात्मक सोच वाला था वह हमेशा दूसरों की भलाई का सोचता था और दूसरा बहुत नकारात्मक सोच रखता था और स्वभाव से बहुत क्रोधी भी था| एक दिन महात्मा जी अपने दोनों शिष्यों की परीक्षा लेने के लिए उनको जंगल में ले गये |
जंगल में एक आम का पेड़ था जिस पर बहुत सारे खट्टे और मीठे आम लटके हुए थे | ऋषि ने पेड़ की ओर देखा और शिष्यों से कहा की इस पेड़ को ध्यान से देखो | फिर उन्होंने पहले शिष्य से पूछा की तुम्हें क्या दिखाई देता है |
शिष्य ने कहा कि ये पेड़ बहुत ही विनम्र है लोग इसको पत्थर मारते हैं फिर भी ये बिना कुछ कहे फल देता है| इसी तरह इंसान को भी होना चाहिए, कितनी भी परेशानी हो विनम्रता और त्याग की भावना नहीं छोड़नी चाहिए | फिर दूसरे शिष्या से पूछा कि तुम क्या देखते हो, उसने क्रोधित होते हुए कहा की ये पेड़ बहुत धूर्त है बिना पत्थर मारे ये कभी फल नहीं देता इससे फल लेने के लिए इसे मारना ही पड़ेगा |
इसी तरह मनुष्य को भी अपने मतलब की चीज़ें दूसरों से छीन लेनी चाहिए | गुरु जी हँसते हुए पहले शिष्य की बढ़ाई की और दूसरे शिष्य से भी उससे सीख लेने के लिए कहा | सकारात्…

Don't Come Down Until That You Can't Achieve Your Success.

Good Morning Friends Ji 😇

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